कवि- शंकर गोयल
जिला-महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक-विचारों की गंगा
नए युग में विचारों की नई गंगा बहाओ तुम।
जो सब कुछ बदल दे ऐसे तूफान उठाओ तुम।।
अगर तुम दृढ़ हो तो आंधियों को मोड़ सकते हो।
अगर तुम ठान लो गगन को तोड़ सकते हो।
अगर तुम ठान लो तो जग इतिहास में,
अपने नाम का तुम एक नया पाठ जोड़ सकते हो।।
अगर तुम अपना पसीना भूमि में मिला दोगे।
करोड़ों लोगों को तुम नया जीवन दिला दोगे।
तुम्हारे शरीर में मेहनत की है शक्ति इतनी,
कहीं भी मिट्टी में तुम सोने के फूल खिला दो।।
वाह ... क्या बात है !
ReplyDelete