Friday, August 14, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- आजादी

नाम----गिरधारी लाल चौहान
स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---छंद मुक्त कविता (आजादी  पर आधारित)
शीर्षक --याद रखना आजादी


व्याख्या ---कवि के द्वारा  भारत की स्वतंत्रता को याद रखने एवं उसकी सुरक्षा करने की बात कही  गयी है ।
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         याद रखना आजादी

याद रखना आजादी, मनाते रहना ।
देश की तिरंगा को, फहराते रहना ।

ये ताकत है अपना, भूलाना नहीं ।
जां से बढ़कर समझना, गवांना नहीं ।
सबसे ये आगे था, आगे ही रखना ।
जब तक रहेगा साथ, घबराना नहीं ।

देश के लिए खून की नदियां, बहाते रहना ।

इसे हिन्दू चाहता है, सचमुच दिल से ।
इसे मुस्लिम चाहता है, बिल्कुल दिल से ।
इसे सिख चाहता है, कहता है दिल से ।
इसे ईसाई चाहता है, बताता है दिल से ।

हम सब का प्यारा है, समझाते रहना ।

लक्ष्मी बाई की तलवार, पाओगे इसमें ।
भगतसिंह की ललकार, पाओगे इसमें ।
सुभाषचन्द्र की विचार, पाओगे इसमें ।
आजाद की आधार, पाओगे इसमें ।

यही अपना चांद सूरज,बतलाते रहना ।

गांधी  जी की  मेहनत का,ये परिणाम है ।
तिलक जी के स्वराज का, ये आवाम है ।
नेहरु जी के सपनों का,यही मुकाम है ।
अम्बेडकर  वादियों का,यह ईनाम है ।

अपने राज का इसमें ताज, चमकाते रहना ।

कुछ स्वप्न अभी है शेष,उसको पाना होगा ।
जरुरत अगर पड़े लहू भी, सबको बहाना होगा ।
सबका भाग्य अभी कहां जगा,उसे जगाना होगा ।
कुछ लोगों के हम हैं कठपुतली,इसे मिटाना होगा ।

हर किसी को आजादी का, मतलब बतलाते रहना ।

गिरधारी लाल चौहान

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