स्थान-बनाई रायगढ़
विधा-हाइकु
शीर्षक -"कोरोना का कहर"
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१.
कहर मचा
कोरोना का बेहद
सुधर जा तू
२.
नक़ाब लगा
आज बेनकाब है
बेहिसाब तू
३.
रसूकदार
स्वयंभू समझता
अब झेल तू
४.
मुँह छिपाया
हुआ शर्मसार है
तोड़ उसूल
५.
हाथ न लगा
तरसता स्पर्श को
कैसी है भूल
६.
सामाजिकता
कहाँ गुम हो गई
अकेले झूल
७.
रहने को तू
आज मजबूर है
घर फिजूल
८.
नामाकूल है
मालूम नहीं तुझे
किया क्या भूल
९.
सम्हलना है
सम्हल जा जरा सा
तोड़ गुरुर
१०.
और कितना
समझाए पुष्पा रे
छोड़ फितूर
Nice lines didi 🙏 kip it up👍
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