संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)
विधा- *हाइकू*
*दस्तक*
आँखे है नम,
दस्तक देते कभी
आते सनम।
आओ सनम,
दरवाजे खोल दो,
देती दस्तक।
3. ईश्वर द्वार,
दस्तक दे संसार
लीला अपार।
चाँद
4. चाँदनी रात,
चारों ओर उजास,
तारों का साथ।
5. गगन में है,
बिखरे चाँद-तारे,
कितने सारे।
6. चाँद उतरे,
सजना के अँगना
करूँ वंदना।
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