रचनाकार श्रीमती पदमा साहू खैरागढ़ छत्तीसगढ़
छंद मुक्त कविता
हे! मानव जीवन में कभी न होना निराश।
हो जाओ गर असफल कोई बात नहीं,
बाधाओं को चीरने होना मत कभी हताश।
*अलख हरि की माया, कहीं धूप कहीं छाया।*
विश्वास अटूट ना हो तो कमबख्त,
साथ छोड़ देती है प्रतिकूल समय स्वयं का साया।
आती रहती है कभी गम कभी खुशियां ।
होठों पर मुस्कान लिए हरदम अपने,
जीवन में बांटते चलना सबको खुशियां।
दुःख पानी की लकीर सुख की लहर से मिट जाएगा।
उम्मीद का दामन कभी न छोड़ना जीवन में,
एक दिन आगे बढ़ बुलंदियों को पाएगा।
श्रीमती पदमा साहू खैरागढ़
जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
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