स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- छंदमुक्त कविता
(आधा तीतर आधा बटेर मुहावरा का प्रयोग)
शीर्षक -"भारतीय सभ्यता"
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भागे भागे फिरते हैं
भारतीय सभ्यता से
और संस्कृति से
जिसे विश्व ने माना
गुण गाता जमाना
पश्चिमी संस्कृति
सुविधा को अपनाती
भारतीय, सादा जीवन
उच्च विचार कहती
अंग्रेजी शासन
क्या आया
पाश्चात्य चलन बढ़ा
तन तो पहने
कोट और टाई
मन में इच्छा
साड़ी पहने माई
तन पर चढ़े
पाश्चात्य सभ्यता
और मन में
भारतीयता छाई
ना पूरी पश्चिमी
ना भारतीय भाई
दो टूक पुष्पा कहती
आधा तीतर
आधा बटेर है साईं ।
बहुत सुन्दर कविता है पुष्पा
ReplyDeleteBilkul sahi kaha aapne kahani ke Madhyam Se Aapne Apni Bat Samne Rakhi
ReplyDeleteBahut Khub Didi