जिला :- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- हम फौजी देश की धड़कन हैं।
हम फौजी देश की धड़कन हैं।
छोड़ कर आए बूढ़े बापू,
छोड़ आए हम बूढ़ी मैया।
तोड़ आए हम बंधन रक्षा की,
बहना जो कहती भैया - भैया।
रक्षा में मां भारती की,
अपनो से अब बिछड़न है।
हम फौजी देश की धड़कन हैं।
हम फौजी देश की धड़कन हैं।
आस लगा हम पर जो आई,
छोड़ आए उस भार्या को।
पापा - पापा कहता फिरता था,
छोड़ आए नन्हें आर्या को।
लौट आने की बात कहे थे,
बहती जलधारा के रूदन है।
हम फौजी देश की धड़कन हैं।
हम फौजी देश की धड़कन हैं।
जब - जब शत्रु ने सीमा पार,
नवल समर को ललकारा है।
ईंट से ईंट बजाने को फिर,
सिंह सा हमने हुंकारा है।
चल पड़े हैं रणभूमि पर हमने,
सर पर बांधे कफ़न है।
हम फौजी देश की धड़कन हैं।
हम फौजी देश की धड़कन हैं।
लड़ते रहे हम अंतिम सांस तक,
कतरा - कतरा बहाया है।
आन बान और शान के खातिर,
अपना फर्ज निभाया है।
सब काज किनारे रखकर,
शिखर पर विराजे वतन है।
हम फौजी देश की धड़कन हैं।
हम फौजी देश की धड़कन हैं।
व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने देश के वीर जवानों का जिक्र करते हुए कहा है कि किस तरह एक फौजी अपना सर्वस्व त्याग कर देश की रक्षा में सीमा पर तैनात रहता है।
No comments:
Post a Comment