जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा कविता
शीर्षक- 21वीं सदी के मानव:
"21वीं सदी केमानव"
हे 21 वी सदी के मानव,
तुम किस कार्य में भिड़े हो,
जिस डाल पर बैठे हो ,
उसी को काटने के लिए तुले हो ।
कर्म स्वतंत्रता और कल्पनाशीलता,
कुदरत से तू यू मुफ्त में पाया है,
उसे यूं ही बर्बाद मत कर ,
उसे समर्पित करने का दिन आया है।
प्रकृति तुम पर समर्पित है,
उनके समर्पण का कद्र करो,
उनके संरक्षण, सुरक्षा के लिए,
तनिक चिंतन विचार करो।
बुद्धिजीवी माना हो तुम,
अपने बुद्धत्व को पहचानो,
सर्व मानव का जीना बन जाए, ऐसी सुपथ मार्ग अपनाओ ।
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व्याख्या -हे 21वी सदी के मानव
तुम क्या क्या काम कर रहे हो। जिस धरती पर बैठे हो उसी को बर्बाद करने पर तुले हो तुम्हारा कर्म स्वतंत्रता और कल्पनाशीलता है जो तुम्हें प्रकृति से मुफ्त में मिला है उसे तुम बर्बाद मत करो ।आज उस कल्पनाशीलता और कर्म स्वतंत्रता को धरती को सजाने में लगाओ ।प्रकृति तुम पर समर्पित है अर्थात प्रकृति तुम्हारे लिए उपकार कर रही है तुम भी उस धरती के उपकार का कद्र करते हुए ,उसकी संरक्षण, संवर्धन के लिए कार्य करो ।तुम बुद्धिजीवी हो मानव तुम अपने बुद्धत्व को पहचानो अर्थात स्वयं की जान को पहचानो और सबका इस धरती पर जीना बन जाए ऐसी सु सु पथ मार्ग को अपनाओ।
श्रीमती उर्मिला सिदार
बुलाकी रायगढ़
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