Monday, June 8, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से डिग्रीलाल जगत निर्भीक की रचना- हाइकु

रचनाकार- डिग्रीलाल जगत निर्भीक
जिला- रायगढ़ (छत्तीसगढ़) 
विधा- हाइकु

छत्तीसगढ़ी,
भाखा हे संवरही,
मोर चिन्हारी।       

छत्तीसगढ़,
धान के कटोरा, 
हे संगवारी,

नवा राज के,
सपना होही सार,
करो तियारी,

शौर्य हे भूमि,
सोनाखान भूइंया,
जस दुआरी।

2 comments:

  1. हाइकु 575 का वार्णिक काव्य है जिसमें कट मार्क का विशेष महत्व है।

    समीक्षार्थ सादर प्रस्तुत
    उगा भास्कर-
    सरोवर में तैरता
    हंस का जोड़ा।1।

    पराग कण-
    मंडराता भँवरा
    पुष्प बाग मे।2।

    अमा की रात-
    टिमटिमाते जुग्नू
    धरती पर।3।

    नदी बहती-
    पावस प्रदेश में
    हिरण झूंड।4।

    बरखा आई-
    लहराता सागर
    अम्बर तले।5।


    तोषण चुरेन्द्र दिनकर

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