Thursday, June 11, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से नलिनी बाजपेयी की रचना- जिंदगी

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
जिला- कांकेर
शीर्षक-जिंदगी
विधा-छंदमुक्त


       *जिंदगी*
अजब गजब रूप दिखाती है-
    जिंदगी।
कभी गमगीन कभी हसीन बनाती है-
    जिंदगी।

अजीब नखरें तेरे,बड़ी
 कहर ढहाती है-
       जिंदगी।

तड़पन है,सिसकन है
 कडुवें घूंट पिलाती है-
         जिंदगी।

कहीं राग -रागिनी कहीं
स्वर्णिम आभा दिखाती है
          जिंदगी।

भोर बचपन, मध्यान्ह जवानी ,संध्या बुढ़ापा कहानी है-
          जिंदगी।

कहीं धूप,कहीं छाँव सुख-दुःख की रवानी है-
           जिंदगी।

माँ की लोरी में सुलझी,
कर्तव्य बोध में है उलझी है-
         जिंदगी।

सदियों में सिमटी कभी सदियों पलों वाली.-
        जिंदगी।

अजीब दास्ताँ, रुपहले किस्सों की निशानी है-
         जिंदगी।

व्याख्या-उपरोक्त कविता में जिंदगी के विभिन्न रूप कभी हँसाना ,कभी रुलाना,कभी गमगीन कभी हसीन आदि विरोधाभासों को व्यक्त किया गया है।

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)

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