जिला- कांकेर
शीर्षक-जिंदगी
विधा-छंदमुक्त
*जिंदगी*
अजब गजब रूप दिखाती है-
जिंदगी।
कभी गमगीन कभी हसीन बनाती है-
जिंदगी।
अजीब नखरें तेरे,बड़ी
कहर ढहाती है-
जिंदगी।
तड़पन है,सिसकन है
कडुवें घूंट पिलाती है-
जिंदगी।
कहीं राग -रागिनी कहीं
स्वर्णिम आभा दिखाती है
जिंदगी।
भोर बचपन, मध्यान्ह जवानी ,संध्या बुढ़ापा कहानी है-
जिंदगी।
कहीं धूप,कहीं छाँव सुख-दुःख की रवानी है-
जिंदगी।
माँ की लोरी में सुलझी,
कर्तव्य बोध में है उलझी है-
जिंदगी।
सदियों में सिमटी कभी सदियों पलों वाली.-
जिंदगी।
अजीब दास्ताँ, रुपहले किस्सों की निशानी है-
जिंदगी।
व्याख्या-उपरोक्त कविता में जिंदगी के विभिन्न रूप कभी हँसाना ,कभी रुलाना,कभी गमगीन कभी हसीन आदि विरोधाभासों को व्यक्त किया गया है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)
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