Friday, May 29, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- काश

रचनाकार -श्रीमती उर्मिला सिदार
 जिले का नाम -रायगढ़
विधा -कविता
शीर्षक- "काश अगर मैं होती"
.........................................  
      काश अगर मैं होती
 काश अगर मैं पंछी होती ,
  नील अंबर में उड़ा करती ,
 वन कानन हरी वादियों में ,  
मस्त हो कलरव करती हैं          
काश अगर मै कुमुदनी होती,
 अंबु सरोवर वास करती,
  रवि की सुनहरी किरणों को,
   सदा मुस्कुराती स्वागत करती।
   अगर मैं सुमन होती,
   सदा बहारों में  मुस्काती,
   मंद पवन के झोंकों से,
   भीनी भीनी खुशबू उड़ती।   
काश अगर मैं भँवरी होती,
 हरी वादियों फूलों की घाटी,                        
 गुंजन कर विचकरण करती 
तरू लता में लुक छुप जाती । 
काश अगर मैं सरिता होती,
तटों को मै सिंचित    करती,
जन ,जीवो की प्यास बुझाती,
सदा मुस्कुराते आगे बढ़ती।
....................................
 

व्याख्या- इस कविता में कवित्री अपनी भावनाओं को संभावना व्यक्त करते हुए पंछी ,कुमुदनी, भँवर ,सुमन ,सरिता   की तरह   अपने भावना को व्यक्त करते हुए उपयोगी होना चाहती है। अगर वह पंछी होती तो पंछी की तरह   कलरव करती। कुमुदिनी बन कर सूर्य का स्वागत करती। पुष्प बनकर खुशबू उडाती। भंवरी बनकर बागों में गुंजन करती। सरिता बनकर जीव जंतुओं की प्यास बुझाती अर्थात अपने भावनाओं को प्रकृति के द्वारा व्यक्त करना चाहती हैं।

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