जिला-कांकेर
विधा :- गजल सृजन
क़ाफिया :- आर
रदीफ :- की तरह
दिनाँक :- 22.05.20
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तुम्हारी यादें लगती है बहार की तरह,
मगर बेरुखी लगती कभी गुलनार की तरह।
चिलचिलाती धूप में चलते चला जाता हूँ,
मिलोगी कभी तो पावस की फुहार की तरह।
तुम खोई इस कदर जग की दरों-दीवार में,
यादों के हर्फ़ों को पढ़ा अखबार की तरह।
पूछना नहीं क्यों दिल चीख रहा बारम्बार,
जगत भी बदला तुम्हारे व्यवहार की तरह।
इश्क की कीमत नहीं है "नलिन" तुम क्या जानो,
तुमने तो समझ लिया इसे व्यापार की तरह।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)
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