जिला - महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक;"करूणाई"
विधा- तुकांत कविता
रस-"करूण"
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बड़ी तंगी गरीबी की मार खाई।
अभाव को भी तो दया आई होगी।।
न की होगी अपने दर्द की परवाह।
पेट अपना काट कौंर खिलाई होगी।।
पेट भर भोजन की चाह त्यागकर।
बीमार बच्चे को दवा पिलाई होगी।।
अस्पताल से दुलारे का शव गोद में।
चलती थरथराई आँखें पथराई होगी।।
घर की ड्योढ़ी तक शीघ्र पहूँचने को।
होकर अधमरी सी दौड़ लगाई होगी।।
हाय रे विधाता देखकर दशा माँ की।
तेरे दिल में भी जागी करूणाई होगी।।
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