जिला - कोरबा छत्तीसगढ़
विधा- कविता
शीर्षक-" कैसे कहूँ तुम क्या हो "
कविता---कैसे कहूँ तुम क्या हो!
मै नैया तुम पतवार हो ।
जिंदगी हूँ मै, तुम मेरे ऐतबार हो ।
एहसासों के एहसास हो ।
माला कि दुनिया में हीरे का हार हो ।
आँखों की सुरमा हो,होठों की लाली ,
तुम्ही से तो लगती है ;
दुनिया मतवाली ।
।।इति ।।
ब्याख्या----रचनाकार प्रेयसी और प्रियतम के बीच मधुर प्रेम को लिपिबद्ध कर रही है जिसमे प्रेयसी कह रही है कि मैं बयाँ नहीं कर पा रही हूँ कि तूम मेरे लिए कितने महत्वपूर्ण हो । तुम मेरे जीवन नैया के पत वार हो आँखों की सुरमा हो और अधरों की मुस्कान हो । मेरे जीवन की हर खुशहाली तुम्ही से ही तो है ।
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गोमती सिंह, कोरबा छत्तीसगढ़
Kese kahun tum kya ho....prem ki parakastha...... bhut sunder rachna...subhashish.
ReplyDeleteक्या बात है दीदी,,
ReplyDeleteबहुत खूब
कैसे कहूं तुम क्या हो़.. प्रेमी के हृदय की सुंदर व्याख्या है प्रेम को समर्पित यह रचना अत्यंत प्रशंसनीय है
ReplyDeleteAwesome,keep it up
ReplyDeleteSuperb
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना।।।प्रेम भाव का सुंदर वर्णन।।
ReplyDeleteवाह! क्या बात है 👌👌🌹🌹
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