राज्य- उत्तर प्रदेश
कविता का शीर्षक- समय का परिवर्तन
हे मन ! तू अधीर न बन
यह समय का हो रहा परिवर्तन,
न रहा ख़ुशी का बोलबाला सदा,
और न ही रहेगा गम,
हे मन ! तू अधीर न बन ।
मन के भय को दूर भागना है,
अवांछित बीमारी को डराना है
संक्रामकता पर विजयी होना है,
सुरक्षित वातावरण बनाना है ।
अपनों के लिए अपनों के पास,
यही है सुरक्षा का एहसास,
कठिन समय यों ही निकल जाएगा,
सुख का सवेरा धूप खिलाएगा।
हे मन ! तू अधीर न बन ।
आवश्यकता है एकजुटता की,
चिंतन की,सामंजस्य की
जाति, वर्ग,धर्म से ऊपर उठ जाना है,
वैश्विक महामारी को दूर भगाना है,
मानव हित को सर्वोपरि बनाना है |
हे मन ! तू अधीर न बन,
हे मन ! तू अधीर न बन |
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