जिला -राजनांदगाँव (छ. ग.)
शीर्षक - "पेट की आग " !
विधा - कविता (मुक्त)
पेट की आग बुझाने ,
किये रोटी की तलाश !
दिन गुजारें पानी पी कर,
रात रखें उपवास !!
छोड़े सारे सुख सुविधा ,
छोड़ दिया आशियाना !
मातृभूमि का आंचल छोड़े,
अब हो गयें हम बेगाना !!
याद आती है कई बार घर,
आँखें नम हो जाती है !
रोने का भी अधिकार नहीं है,
मन व्याकुल हो जाती है !!
ये कैसी विपदा आई है,
न हम घर में है न घाट में !
मौत का साया पग-पग चले,
डर रहता दिन रात में !!
दूजराम साहू
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