राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - बापू की चिंता
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कविता-
बापू का रोता विचार
मैं भारत का गाँधी हूँ, चिंता में रोता रहता हूँ ।
नींद नही आती है मुझको, कभी कभी ही सोता हूँ।।
सत्य अहिंसा के साथ चला मैं, दिन दुःखी की सेवा में।
छुआछूत को दूर भगाने, हरिजनों की सेवा में।।
स्वप्न मेरा था स्वच्छ भारत का ।
बना दिये सब सेल्पी लेने का।।
मैं भारत का गाँधी हूँ, चिंता में रोता रहता हूँ ।
नींद नही आती है मुझको, कभी कभी ही सोता हूँ।।
लोकतंत्र भी आई चपेट पर ।
मिलता है आज वोट नोट पर।।
अकेली अबला डरती फिरती, पथ निडर चलने को ।
क्या पता कल रेप केस में, पड़ा दरिंदा छलने को ।।
मैं भारत का गाँधी हूँ, चिंता में रोता रहता हूँ ।
नींद नही आती है मुझको, कभी कभी ही सोता हूँ।।
किसान और मजदूर देखो, होते हैं भोलेभाले।
मेहनत करते हैं दिन भर ये, नही करते घोटाले ।।
साथ नही देते हैं इनको, रहते हैं ये अकेले। ।
हाथ बढ़ा कर भड़का दो, इनके अंदर शोले ।।
मैं भारत का गाँधी हूँ, चिंता में रोता रहता हूँ ।
नींद नही आती है मुझको, कभी कभी ही सोता हूँ।।
अपना हो तो सब देखते हो ।
दूसरे का तुम नाक बंद करते हो ।।
जिस दिन दूसरे अपने होंगे ।
उस दिन सपने पूरे होंगे ।।
मैं भारत का गाँधी हूँ, चिंता में रोता रहता हूँ ।
नींद नही आती है मुझको, कभी कभी ही सोता हूँ।।
मुझे लगा था मेरी सूरज, एक दिन शीतल होगी ।
शीतलता का पता नही, ज्वलन होके डूब गई।।
पर लगता है मेरे सपूतों, सुरज शीतल होगी।
मेरे विचारों से भारत पुनः, सोने की चिड़िया कहलाएगी।।
मैं भारत का गाँधी हूँ, चिंता में रोता रहता हूँ ।
नींद नही आती है मुझको, कभी कभी ही सोता हूँ।।
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