Wednesday, April 22, 2020

छत्तीसगढ़ से संजय कुमार साहू की रचना- सैर करते हैं

नाम : संजय कुमार साहू
पता : जिला बालोद छत्तीसगढ़
विधा : कविता 
शीर्षक : सैर करते है 

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चल मेरे साथी , दुनिया की सैर करते है ,
मोहब्बत की इस दुनिया में मिटाते सारे बैर चलते हैं,
नवजीवन के एहसासों में ,
विश्वबन्धुत्व को पसारने  अपने पैर देते हैं ।।
चल मेरे साथी दुनिया की सैर करते है.......

 शाहजहां ने जैसा ताजमहल बनाया,
अपनी मोहब्बत दीवारों पर लिखवाया ,
कुछ ऐसा ही हम करने  चलते है ,
जीवन के महल में संगमरमर रूपी भाईचारा साथ लेकर चलते हैं।।
चल मेरे साथी दुनिया की सैर करते हैं...

चलो देखे सुंदरवन ,
पशु पक्षी के निरव रुदन,
इंसान नहीं तो जानवर से ही कुछ सीख लेने चलते है 
मधुर मिठास हो इस जीवन में , 
बीज ऐसा अंकुरित करते  चलते है।।
चल मेरे साथी दुनिया की सैर करते हैं....

देखते है विशाल  हिमालय को ,
अपने गर्भ में कईयों जीवन पालता है ,
काले, भयंकर मेघ के आगे छाती ताने खड़ा रहता है,
दुनिया को कहता सीख मुझसे सभी परिस्थितियों में खड़ा रहता हूं,
संकल्प लेकर इन कनो से हम जीत लेकर आगे बढ़ते हैं ।।
चल मेरे साथी , दुनिया की सैर करते हैं.....



      ---- संजय साहू---

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