Wednesday, April 29, 2020

छत्तीसगढ़ से बरखा भाटिया की ग़ज़ल

नाम-बरखा भाटिया
राज्य-छत्तीसगढ़(कोण्डागांव)

ग़ज़ल
अंधेरों का ज़िक्र भुलाके,दिए जलाना अच्छा है
लाख दुखों के बीच खड़े होकर मुस्काना अच्छा है

आंधी-तुफ़ां, पतझड़ आते रहते हैं,हर गुलशन में
सूनी डाल  पर नए फूल का, फिर खिल जाना अच्छा है

दुनिया के तिशने-ताने हैं, चालें भी हैं, दुश्मन की
अपना दुखड़ा रोने को,एक दोस्त बनाना अच्छा है

पथरीली है राह हमारी, कांटे, ठोकर भी जिसमें
चाहे जितनी मुश्किल हो पर, चलते जाना अच्छा है

कुछ पाने की चाहत है तो,खोने का जज़्बा भी रखो
क़िस्मत के सौदे में कुछ खोकर, कुछ पाना अच्छा है

अक्सर कुछ बेनामी रिश्ते,जा जाते हैं ‌हस्ती पर,
जानबूझकर कभी-कभी, कुछ रिश्ते भुलाना अच्छा है

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