शीर्षक - लॉक डाऊन
राज्य - राजस्थान अजमेर
संपर्क -9461324842
लॉक डाऊन
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लॉक डाऊन ने भी वो कमाल कर के धर दिया है
कविओं के आलावा सभी को निठल्ला कर दिया है
एक कवि ही है जो इन दिनों सबसे ज्यादा मस्त है
सोशल मीडीया पर धमाधम कवितायें चिपकाने में व्यस्त है
रोज कोरोना पर दो चार कवितायें गढ़ रहे हैं
ऐसा लगता है कोरोना से सबसे ज्यादा ये ही लड़ रहे हैं
कुछ कवि तो फेसबुक पर वीडियो बना बना कर एसे डाल रहे हैं
मानो कविता नही कोरोना वायरस का टीका निकाल रहे हैं
जिनके पास मरने की भी फुरसत नही थी वो भी आज ठाले बैठे हैं
और जिनके पास फुरसत ही फुरसत थी वो माथे पे शिकन डाले बैठे हैं
काम वाली बाईयों की छुट्टी से पत्नियां सन्ना रहीं हैं
जरा जरा सी बात पर पतियों पर ही भन्ना रहीं हैं
लॉक डाऊन में बेचारा आदमी ही सबसे ज्यादा मर रहा है
वर्क फ्रॉम होम के साथ साथ वर्क ऑफ़ होम भी कर रहा है
आदमी बेचारा ऑफिस में तो पिसता ही था घर में भी पिस रहा है
झाड़ू पोंछा और कपड़े धोने के साथ साथ बर्तन भी घिस रहा है
ये लॉक डाऊन पतियों के लिये तो मानो सश्रम कारावास है
घर में रहते हुऐ भी ओवर टाइम करने का सा आभास है
जो भी पत्नी से बचने के लिये घर से बाहर जा रहे हैं
वो पुलिस का प्रसाद खाकर सहलाते हुऐ वापस आ रहे हैं
और इधर कुछ लोग तो जैसे सुरसा का सा रूप धर रहे हैं
कल का पता नही है राशन तीन तीन महीने का भर रहे हैं
जहाँ कुछ लोग जरूरतमंदों को खाना और राशन बाँट रहे हैं
वहीं कुछ भेड़िये कालाबाजारी करके अभी भी चाँदी काट रहे हैं
नमन करता हूँ खाकी और सफेद कोट को जो जान जोखिम में डालकर भी अपना फर्ज निभा रहे हैं
वरना कुछ लोग तो गुटखे और दारू के चक्कर में ही पिट पिट कर घर आ रहे हैं
घर के अंदर रहना ही आज वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है
जिंदगी की कद्र करलो दोस्तों ये जिन्दगी बड़ी खूबसूरत है
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