Monday, April 13, 2020

छत्तीसगढ़ से नलिनी बाजपेयी की रचना- मंत्र

कवयित्री-नलिनी बाजपेयी
शीर्षक:- *मंत्र*
राज्य:- छत्तीसगढ़

             मन्त्र
•°•°•°•°•°•°•°•°•°•
जाने कौन सा मन्त्र है,
माँ खिंचे चले आता हूँ।
तेरी उम्रे-दराज आजादी के
लिए कुर्बान हुए जाता हूँ।

अंजान नहीं हूँ 
माँ बलिदानी राहों से,
उन त्याग भरी राहों में फूल
बन बिछ जाना चाहता हूँ।

बनी रहो माँ अखण्ड 
दीपशिखा की अखण्ड ज्योत सा,
कुर्बानी की राहों पर आजादी 
की प्रखर दीप बन जाना चाहता हूँ।

ऊँचा रहे भाल तुम्हारा माँ, 
इस सोच में उम्र गुजारी है,
स्वतंत्रता का जज्बा 
मादरे-वतन के लिए 
क़ैदे उल्फत में जीना चाहता हूं।

तुझे सुख-चैन से देखूं 
शांति समृद्धि से हो भरपूर,
चिरंजीवी हो वतन मेरा यही
अरमान पालना चाहता हूँ।

जाने कौन सा मन्त्र है 
माँ खिंचे चला आता हूँ,
तेरी उम्रे-दराज आजादी के
लिए कुर्बान हुए जाता हूँ।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _✍🏻

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर (छ .ग.)

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