Friday, April 3, 2020

छत्तीसगढ़ से स्नेहलता "स्नेह" की रचना- नवगीत

स्नेहलता "स्नेह"
सीतापुर,सरगुजा छ.ग.
नवगीत

रक्त बीज फिर आ बैठा है
भारत की फुलवारी मेंं
प्राण बचा लो आ के मैया
मदद करो बीमारी में

हे आनंदी शैवी धवला
दुर्गवी काली कमला
नव जीवन दे माता तुलजा 
रोते हैं बालक अबला 
विनय निवेदन करती हूँ मैं
दो शक्ति लाचारी में

हर युग में तो नारी ही ने 
स्वर्णिम सा इतिहास रचा
चाह फिरंगी हो या दानव
क्रोध ज्वाल से कहां बचा 
शक्ति रूप के दर्शन कर लो
लक्ष्मी में झलकारी में

शक्ति पीठ सजते इन्क्यावन
 मात सती के अंगों से
भक्त द्वार सढ़ भरते आते
 विविध विविध के ढंगों से
माँ ज्वाला के सुमिरन करते
नन्ही एक चिंगारी में
प्राण बचा लो आते मैया
  मदद करो बीमारी में


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