राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - देखो भारत
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देखो भारत
दो सौ वर्षों तक,
विदेशियों की गुलामी,
की है तुमने,
तब कहीं जाकर,
नित संघर्षो के पश्चात,
तुम्हें आजादी मिली है।
देखो भारत,
यह आजादी बाजार से,
पैसों के बदले न लायी गई,
अपना शीश कटा,
सीनों पर गोलियां खा,
फांसी के फंदो को गले लगा,
उसके उपरांत पाई है।
देखो भारत,
बस इतनी सी गुजारिश,
कभी कुर्बानियों को न छोड़ना,
देना पड़े कुर्बानी,
सहज देना,
और किसकी,
बस बेईमानी की,
भ्रष्टता की,
और अकर्मण्यता की,
इस विषम संकट की बेला मे,
बाहर निकलने की,
वस्वच्छता पर लापरवाही ,
करने की,
और हर नजदीकियों की।
देखो भारत,
आजादी के बाद,
आज,
बस इतना सा ही तो,
करना है।
---- संतोष श्रीवास्तव "सम"
कांकेर, छ. ग. ।
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