Wednesday, April 1, 2020

बिहार से आचार्य गोपाल की रचना- नयन

आचार्य गोपाल जी 
आजाद अकेला (बरबीघा वाले) 
बिहार
कविता का शीर्षक :-  नयन
9771675729

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स्नेह का पावन कलश
          मैं तोड़ आया निज करो से
 प्राप्त अमृत चख ना पाया 
           मैं प्यासा निज अधरों से
 देख ना पाया जगत को
            रहा अनदेखा निज नयन से 
आज सारी भूल का 
            पश्चाताप कर लूं मैं इस क्षण से 
स्नेह की सरिता बहा दूं 
            मैं आज यहां अपने ही कर्म से 
देखना है फिर से जगत को 
            आज फिर निज नयन से
 करना है नेत्रदान हमें
                 सच्चे हृदय नि:स्वार्थ भाव से
 आवाहन करें , करें प्रेरित
                नेत्रदान के लिए जगत को जतन से 
अकेले करें यह कार्य पावन
               आजाद नई चलन चलाएं अपने करम से
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