राजस्थान
कविता-ये भूख क्या होती है।
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शीर्षक:- *भूख क्या होती है?*
भूख की कीमत अमीर न जाने,
जाने गरीब मजदूर।
विषम परिस्थिति में जाते कमाने,
कमाने घर से अति दूर।
जठराग्नि भेजे खुद को खपाने,
खपाने को है मजबूर।
देख दीं दशा लगा देश शर्माने,
शर्माने को लगा भरपूर।
शिक्षा क्या होती है,
माँ भूखी क्यों सोती है?
खुद को काट के दीन,
लाता दो रोटी है।
अगले दिन फिर सामने,
विकट चुनौती है।
बेघर से तुम पूछो,
ये भूख क्या होती है?
बच्चों की खातिर माँ
दिन रात ही रोती है।
भूख ही खाती है,
भूख ही पीती है।
भूख से लड़ते जब
सांस उखड़ती है।
बच्चों का यक्ष प्रश्न
माँ भूख क्यों लगती है?
भूख से कह दो माँ
लगना बंद कर दे।
ऐ जठराग्नि तू अपनी
आंच कम कर दे।
बाबा मेरे गए कमाने दो रोटी है,
आश्रितों के सामने ये भीषण चुनौती है।
अमीर वर्ग तो खाता,
बर्गर और पिज्जा है।
हमारे जीने की तो जैसे
भूख ही सजा है।
हाथ फ़ैलाने में सबको
आती अति लज्जा है।
हमारे भूख-दुःख में
जैसे विधाता की ही रजा है।
प्रभु बता दो कब होगी,
दुःखो में कटौती है।
बच्चे रोज पूछे ये
भूख क्या होती है?
बच्चे रोज पूछे ये
भूख क्या होती है?
गौरव सिंह घाणेराव
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