Monday, April 20, 2020

छत्तीसगढ़ से देविका साहू की रचना- २०२०

देविका साहू
रायपुर, छत्तीसगढ़
कविता "साल २०२०"
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ये कैसा साल है,
सब दर-बदर हैं,
हाल-बेहाल है।
हर गली सुनसान,
सहमा हर इंसान है।
कोई नहीं जानता कल क्या होगा,
कोई नहीं जानता अगले पल क्या होगा,
फिर भी आतंकियों के हौसले
अब भी बरकरार हैं।
धरती हिल रही है कहीं,
आसमान फट रहा है कहीं,
फिर भी आदमी की नीयत में
खुदग़र्ज़ी बेशुमार है।
सियासी दाँव-पेंच समझ आते नहीं मुझे,
पर सियासत से बस यही दरख्वास्त है,
बख्श दो इन मासूमों को,
जो सिर्फ दो रोटी की ताक में हैं।
मत करो इतना शैतानी नाच,
कि धरती तुम्हें लीलने की आस में है|
निकलो अपने आलीशान  सकूनत से और देखो,
कि सब दर-बदर हैं,
हाल-बेहाल है।
कि सब दर-बदर हैं,
हाल-बेहाल है।

1 comment:

  1. क्या इसी तरह बीत जाएगा यह साल?

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