Monday, April 13, 2020

छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- जलियांवाला बाग

सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला-महासमुन्द 
शीर्षक - जलियांवाला बाग की याद
मोब.-8103535652
        9644035652

जलियांवाला बाग के अमर शहीदों को सलाम।
अमर कुर्बानी का पावन अमृतसर शुभ धाम।।
तड़ातड़ चली थी निहत्थों पर अनगिनत गोलियां।
कसूर था बस बोल रहे थे इंकलाब की बोलियाँ।।
जनरल डायर की बर्बरता की चली थी अंधाधुंध गोलियां।
महिलाओं बच्चों पर खेली गई खून की होलियां।।
निर्दयी जनरल डायर को तनिक भी दया नहीं आया था।
माँ,बच्चे,बूढ़ों की शव से कुआँ को पटवाया था।।
क्रूरता,बर्बरता की चीख पुकार क्रंदन सुनाई देती है।
दीवार आज भी खून से लहूलुहान दिखाई देती है।।
शांतिपूर्ण सभा को जनरल डायर ने बना दिया दुःखद विवाद।
उन अमर बलिदानियों की कहानी सर्वदा रहेगी याद।।
बैशाखी का पर्व उल्लास का उसे बना दिया विषाद।
जलियांवाला बाग की निशानी हमेशा रहेगी आबाद।।

सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"

1 comment:

  1. रचनाएं पढ़कर मन आनंदित हो गया , आप नवोदितों को एक सशक्त और सार्थक मंच प्रदान कर रहे हैं, आपकी यह पहल एक महत्वपूर्ण पहल है। धन्यवाद। रचनाएं भेजने हेतु ईमेल देने का कष्ट करें।

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