राज्य- महाराष्ट्र
कविता का शीर्षक- अपनी "जिंदगी" हमें नाम दे गया
बरसों से तलाश थी जिसकी वो मेरा हमनवां हो गया
आने में देर लगी उनको आखिर उनका आना हो गया
एक तड़प एक प्यास जो सुलगती रही थी सीने में मेरे
कैसे उनके दिल को मेरे तन्हा सफर का पता हो गया
मेरे मेहरबां की पाक मोहब्बत में गज़ब की है कशिश
चंद मुलाकातों में ये दिल उनका तलबगार हो गया
खुशनसीबी है ये हमारी उनके जेहन में अब रहते हैं हम
तपते हुए मन को वो आकर जैसे सुकूँ की छाँव दे गया
जिसके अहसासों से खुशनुमा हुई है ये जिंदगी हमारी
वो कहकर हमें जिंदगी अपनी "जिंदगी" हमें नाम दे गया
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