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शीर्षक - जीवन यात्रा
जीवन यात्रा
बेफिक्री से उदित जीवन यात्रा ,
पर उलझनों की असीमित मात्रा -
लेकर, जिम्मेदारी से भरे यौवन में प्रवेश ,
बहुत कुछ खोकर-पाकर भी ,
रह गए स्वयं शेष ,
इस रिक्तता का कारण क्या ?
असीमित इच्छाओं का निवारण क्या ?
सुखद -दुखद कई मोड़ ,
सुख इच्छित नही, न दुख का तोड़ ,
फिर भी यात्रा तो करनी ही है ,
क्योंकि लड़ना ही जीवन की पहचान है,
हार जाना ही अवसान है ,
पर काश कोई इस सुख-दुख से परे हो जाए ,
मानवता पर खरे हो जाए ,
जैसा सोचा है वैसा होगा !
न जाने इसका अंत कैसा होगा ?
हम सुख में दुख न भूलें ,
और दुख में सुख ढूंढ ले ,
अंत ही चरम है ,
पर न जाने ये किस मोड़(बचपन, युवा या बुढापा ) पर हो ,
काल कब किसके सर पर हो ?
जीवन पथ पर चलना है ,और
सत्कार्यों का तान हो ,
मुसाफ़िर हम सभी हैं इस सफर का,
न जाने कब अवसान हो ?
-- शैलेन्द्र चेलक --
बेहतरीन........ चेलक सर जी
ReplyDeleteVery good chelak ji
ReplyDeleteधन्यवाद आपलोगों का
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