राज्य-पश्चिम बंगाल
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शीर्षक-"पश्चाताप"
स्वर्ग से आई है एक खबर
पछता रहे हैं भगीरथ
गंगा को धरा पर लाकर
कैलाश पर्वत से आई है ये खबर
पछता रहे हैं शिवशंकर
अपनी जटा को खोलकर
ब्रह्मलोक से आई है ये खबर
पछता रहे हैं ब्रह्मा
अपने कमंडल से गंगा निकालकर
हिमालय से आई है ये खबर
पछता रही गंगोत्री
गंगा को अपने घर से निकलकर
पर्वत मालाओं से आई है ये खबर
पछता रहे हैं पर्वत
गंगा को आगे जाने का रास्ता देकर
गंगासागर से आई है एक खबर
पछता रहे हैं मुनिवर
सगर पुत्रों को श्राप देकर
गंगा के लहरों से आई है एक खबर
पछता रही स्वयं गंगा
पतित पावनी होकर
धरती से खबर कब आयेगी
मानव कब पछतायेगा
"दीनेश" अपनी गलती मानकर
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
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