राज्य- पश्चिम बंगाल
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शीर्षक -" चक्र सुदर्शन खामोश है"
महाभारत में एक बार
द्रौपदी का चीरहरण हुआ था
इस भारत में रोज-रोज
द्रौपदी का चीरहरण होता है
बच गई थी द्रौपदी उस वक्त
नंगी होने से ,लेकिन
अब रोज नंगी होती है
दुर्योधन और दुःशासन की
संख्या रोज बढ़ती जाती है
ताकत उनकी बढ़ती जाती है
मौन भीष्मों की संख्या भी
बढ़ गई है अब तो
पर पता नहीं श्रीकृष्ण का
न जाने कहाँ बेसुध हो
बाँसुरी बज रहे हैं
सुना है जब-जब धर्म की
हानि होती है और
पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ते हैं
आप अवतार लेते हैं
तो क्या धर्म की हानि होनी
अभी और बाकी है
या अवतार लेना नहीं चाहते
शिशुपालों की गलियों की
संख्या सौ के पार हो गई है
लेकिन
आपका चक्र सुदर्शन क्यों
अभी तक खामोश है.
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
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