राज्य-छत्तीसगढ़
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शीर्षक -*अमावस*
रात अमावस आये जब,
नया सबेरा लाती है।
नव प्रभात की नव किरणों से,
नया विश्वास जगाती है।
रात अमावस ना आये तो,
पूनम कैसे आएगी।
चौथ की पूजा,दूज की आभा,
सब अधूरी रह जाएगी।
अमावस्या माँ काली के,
पूजा का दिन होता है,
महालक्ष्मी का पूजन भी तो
अमावस को ही होता है।
पूनम,अमावस के चक्र से ही,
ज्वार और भाँटा आते है।
सागर के तल का अनमोल खजाना,
ये ही तट तक पहुंचाते है।
अमावस की रात भी प्यारे,
बड़ी सुनहरी होती है।
झिलमिल झिलमिल तारे चमकें,
जुगनू जैसे मोती हैं।
अपना अपना नजरिया है,
हर दिन औ हर रात भली।
मन चंगा होवे जब भैया,
कठौती में गंगधार मिली।
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विजिया गुप्ता "समिधा"
दुर्ग-छत्तीसगढ़
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