पता - पेंडरवानी , बालोद , छत्तीसगढ़
सम्पर्क -9098518976
शीर्षक - एक सुबह
एक सुबह
=================
काश !
एक सुबह ऐसा भी आए मेरे देश में ,
जब
न जाति - पाती हो ,
न अवर्ण - सवर्ण ,
न मजहबों के झमेले हो ,
बसते हो इंसान यहां ,
बस मानवता के मेले हो ,
एक सुबह ऐसा यहां ,
जब छोड़ पंजाब -बंगाल -
हिमांचल ,
केरल -कर्नाटक - यूपी -
उत्तरांचल ,
सबके सब आगे बढ़े सहर्ष ,
बस सब भारतीय ही हो ,
और विकसित हो भारतवर्ष ,
काश !
एक सुबह ऐसा आए ,
जब न हो ईर्ष्या , कपट ,
जन का जन से ,
एकता की एक आवाज ,
आए धरती से , गगन से ,
न स्वार्थ की राजनीति ,न हो भ्रष्टाचार ,
विचारशील ,सदभाव परख हो
बढ़े सबमें सदविचार ,
न शोषण हो न अत्याचार ,
न छीने किसी का अधिकार ,
अपने को सही बताते ,
न हो देश में नरसंहार ,
हो मिलजुलकर साथ निभाते ,
हर किसी को ,हर कोई भाते ,
हे ईश्वर !
वो दिन रोज हो ,
वो सुबह जल्दी आए ..........
- शैलेन्द्र चेलक -
Nice thought sir. May I wish your poem will be Success.
ReplyDeleteBeautiful line sir . I hope you will a great weekend
ReplyDeleteThanks
ReplyDeleteवह सुबह जल्दी आएगी सर डोंट वरी
ReplyDeleteहा सर
ReplyDelete