राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - दहलीज
*दहलीज*
दिल की दहलीज पर
जब से दस्तक
तेरी हुई है,
खोया हर लम्हा
खोयी हुई नजरें
बस छायी हुई,
हरपल बेकरारी।
ख्वाब चंचल से
और मचलते हुए
अब तो ज़ज्बात है।
बिखरी है किताबें
मेरी जिंदगी की,
आके देख "रश्मि "
दिल की दुनिया पर
जब से दस्तक
तेरी हुई है।
कभी गुलाब
कभी आफताब
हो रही हूँ।
सच कहूं!
खुली आंखों में
सजीले सपने
रोज़ बो रही हूँ।
दिल की दहलीज पर
जब से दस्तक
तेरी हुई है।।
रश्मि अग्निहोत्री
केशकाल, जिला कोंडागांव
बहुत ही सुंदर रचना... ऐसे ही लिखते रहें..
ReplyDeleteरश्मि
मर्म है, अच्छी लगी1 रचना👌
ReplyDelete