Monday, November 4, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि गजेन्द्र द्विवेदी गिरीश की रचना- मगर क्या है!!


रचनाकार – गजेन्द्र द्विवेदी गिरीश
राज्य – छत्तीसगढ़ (भिलाई 3)
शीर्षक - मगर क्या है

मुझमें तुझमें कुछ तो है, मगर क्या है
हो पता तो ढूँढ लायें बात, मगर क्या है

अकसर तड़पते तुम काटते रात, मैं भी,
हल निकाले अब खुदा ही, मगर क्या है

उड़ ना जाए बादलों संग गर्माहट कहीं,
भाव अब भी नहीं बर्फीले, मगर क्या है

कानों में गूंजते गीतों सी हैं बातें तेरी,
कहीं से हैं नहीं अनजान, मगर क्या है

तीखी मीठी यादें हैं संग-संग सफर के,
अनुठे स्वाद सी लगती, मगर क्या है

अधभरा ही रह गया प्याला सबर का,
रुकावटें तो सामने ही हैं, मगर क्या है

गिरीश की है आरजू कि चलते ही रहें,
मिल जायेगी मंजिल हमें, मगर क्या है

©गिरीश

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