कवयित्री- इन्दु कुमारी
राज्य- झंझारपुर बिहार
शीर्षक - आ साथ चलें
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राज्य- झंझारपुर बिहार
शीर्षक - आ साथ चलें
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आ साथ चलें
जीवन की उलझे राहों की
हमदर्द तुम्हीं, हमराज तुम्हीं
मेरी चिंतन के शब्दों में
हर बार तुम्ही,हर राज़ तुम्ही
हमदर्द तुम्हीं, हमराज तुम्हीं
मेरी चिंतन के शब्दों में
हर बार तुम्ही,हर राज़ तुम्ही
आ चंद कदम तो साथ चलें
क्या खोना है क्या पाना है
जीवन तो चलती धारा है
एक रोज हमें बह जाना है
क्या खोना है क्या पाना है
जीवन तो चलती धारा है
एक रोज हमें बह जाना है
ये वक्त गुजरता जाएगा
ये उम्र निकलती जाएगी
आओ जी ले इस पल को
क्यो हम इसको बर्बाद करें
ये उम्र निकलती जाएगी
आओ जी ले इस पल को
क्यो हम इसको बर्बाद करें
उन लम्हों को तो जी लें हम
जिन लम्हों में हम साथ चलें
आ जाओ बैठो पास मेरे
उन लम्हों को फिर याद करें
आ साथ चलें,आ साथ चलें
इन्दु कुमारी
जिन लम्हों में हम साथ चलें
आ जाओ बैठो पास मेरे
उन लम्हों को फिर याद करें
आ साथ चलें,आ साथ चलें
इन्दु कुमारी

सुंदर कविता अद्भुत भाव संयोजन
ReplyDeleteBahut sundar
ReplyDeleteBahut khub
ReplyDeleteAb tak ka sabse acha kavita
ReplyDeleteBahut khub
ReplyDeleteबहुत अच्छी रचना। लिंग की त्रुटियों पर अधिक ध्यान देने से रचना और अच्छी लगेगी
ReplyDeleteHeart touching👌👌👌👌👌👌
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