बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
शीर्षक - -
*मैं क्रोध का कवि हूँ*
राज्य - राजस्थान
संपर्क - 8769764786
शीर्षक - -
*मैं क्रोध का कवि हूँ*
राज्य - राजस्थान
संपर्क - 8769764786
मैं क्रोध का कवि हूँ।
शासन की निरंकुशता के विरोध का कवि हूँ,
मैं क्रोध का कवि हूँ।
व्यवस्था जब पथ से भटके,
काज मनुजता के हो अटके,
भटके जन पाने न्याय को,
राजनीति पोषित करे अन्याय को,
तब हर जन की पीड़ा की छवि हूँ।
मैं क्रोध का कवि हूँ।
शासन की निरंकुशता के विरोध का कवि हूँ,
भूखे को भोजन ना प्यासे को पानी,
बेकार ही बीत रही हो जब जवानी,
त्रस्त किसान, नष्ट हो रही किसानी,
मजदूर,कामगार,व्यापारी की यही कहानी,
तब शोषण के तम को तोड़ता रवि हूँ।
मैं क्रोध का कवि हूँ।
शासन की निरंकुशता के विरोध का कवि हूँ।
बच्चों का बचपन जब कोई छीनता हो,
हृदय होता विदीर्ण जब वह कचरा बीनता हो,
चौराहों की लाल हरी बत्ती पर भिखमंगे बच्चों की वो लाचारी,
ऐसा लगता है कि स्वयं महादेव करने लगे हो प्रलय की तैयारी।
तब उनके जीवन यज्ञ में जलता हवि हूँ,
मैं क्रोध का कवि हूँ।
शासन की निरंकुशता के विरोध का कवि हूँ।
जब तक शासन नहीं चेतेगा,
"वज्रघन" कवि चुपचाप नहीं बैठेगा,
कलम से क्रांति का एक सैलाब उठेगा,
सितम और सितमगर का वजूद मिटेगा,
प्रसुप्त चेतना को उद्दीप्त करती अग्नि हूँ,
मैं क्रोध का कवि हूँ।
शासन की निरंकुशता के विरोध का कवि हूँ।
बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
खंडेला जिला सीकर राजस्थान
खंडेला जिला सीकर राजस्थान

जय हो गुरू शानदार जानदार जोरदार 👌👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteशानदार रचना है आपकी
ReplyDeleteआभार
Deleteशानदार जय होगुरू जी
ReplyDeleteआपका आभार
DeleteBahut achhi rachna
ReplyDelete😍😍
ReplyDeleteGood
ReplyDeleteGood and best performance guru
ReplyDeleteधन्यवाद भाई जी
Delete👌👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद जी
ReplyDelete👌
ReplyDeleteआभार
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