नाम - संजय कुमार
राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - " समय अपना लाएंगे "
- जिला बालोद (छ.ग.) 6268270482
राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - " समय अपना लाएंगे "
- जिला बालोद (छ.ग.) 6268270482
{}{}{}{}{}[][][]{}{}{}{}{}
"घड़ी जैसी भी हो , समय अपना लाएंगे ।
जिंदगी में कुछ कर गुजर जायेंगे ,
घड़ी जैसी भी हो पर समय अपना लाएंगे ।।"
~~~~~~~~~~~~
करेंगे मेहनत , खुद को तूफ़ां बनाएंगे ,
तूफां बनाकर हम दुनिया में छाएंगे
जहां बैठेंगे सुर्खियां वहां पाएंगे ,
पहचान न बताना पड़े ऐसा सम्मान पाएंगे ,
हार और जीत के इस दौर में ,
हम झंडा अपना लहराएंगे ,
घड़ी जैसी भी हो , लेकिन समय अपना लाएंगे ।।
~~~~~~~~~~~~~
अरे कहीं गिर गए तो क्या हुआ
उस जगह पर भी नाम अपना लिखवाएंगे
अभी जो सो गए तो सोते रहेंगे
फिर इस दुनिया से नकारते जाएंगे ,
तब आएगी उस रात की याद जब हम ठोकरें खाएंगे
तब भी नहीं जागे तो ये दुनिया हमें हमारा औकात दिखाएगी ,
इसलिए उपाय से बेहतर सावधानियां बनाएंगे ,
घड़ी जैसी भी हो , पर समय अपना लाएंगे।।
जिंदगी में कुछ कर गुजर जायेंगे ,
घड़ी जैसी भी हो पर समय अपना लाएंगे ।।"
~~~~~~~~~~~~
करेंगे मेहनत , खुद को तूफ़ां बनाएंगे ,
तूफां बनाकर हम दुनिया में छाएंगे
जहां बैठेंगे सुर्खियां वहां पाएंगे ,
पहचान न बताना पड़े ऐसा सम्मान पाएंगे ,
हार और जीत के इस दौर में ,
हम झंडा अपना लहराएंगे ,
घड़ी जैसी भी हो , लेकिन समय अपना लाएंगे ।।
~~~~~~~~~~~~~
अरे कहीं गिर गए तो क्या हुआ
उस जगह पर भी नाम अपना लिखवाएंगे
अभी जो सो गए तो सोते रहेंगे
फिर इस दुनिया से नकारते जाएंगे ,
तब आएगी उस रात की याद जब हम ठोकरें खाएंगे
तब भी नहीं जागे तो ये दुनिया हमें हमारा औकात दिखाएगी ,
इसलिए उपाय से बेहतर सावधानियां बनाएंगे ,
घड़ी जैसी भी हो , पर समय अपना लाएंगे।।
~~~~~~~~~~~
विद्यार्थी जीवन में जब हम थे
न दुनिया की खबर रखते थे
न दुनिया को खबर देते थे
बस पीठ पर बस्ता और चेहरे पर मुस्कान थी,
बस उसी मुस्कान की घूंट पूरे दुनिया को पिलाएंगे
घड़ी जैसी भी हो पर समय अपना लाएंगे ।।
~~~~~~~~~~~~
अब इस जीवन की दौड़ की क्या कहे साहब ,
चाहत पानी में उड़ने
और जमीन में तैरने की है
क्या पता ये कारनामा किसी दिन हम ही कर दिखाएंगे ,
वो जीत कर भी रोए
हार भी हम ऐसा पाएंगे ,
घड़ी ऐसी - वैसी -जैसी भी हो पर समय अपना लाएंगे ,
जिंदगी में कुछ कर गुजर जायेंगे ।।
घड़ी जैसी भी होगी पर समय अपना लाएंगे।।
~sanjay kumar sahu
विद्यार्थी जीवन में जब हम थे
न दुनिया की खबर रखते थे
न दुनिया को खबर देते थे
बस पीठ पर बस्ता और चेहरे पर मुस्कान थी,
बस उसी मुस्कान की घूंट पूरे दुनिया को पिलाएंगे
घड़ी जैसी भी हो पर समय अपना लाएंगे ।।
~~~~~~~~~~~~
अब इस जीवन की दौड़ की क्या कहे साहब ,
चाहत पानी में उड़ने
और जमीन में तैरने की है
क्या पता ये कारनामा किसी दिन हम ही कर दिखाएंगे ,
वो जीत कर भी रोए
हार भी हम ऐसा पाएंगे ,
घड़ी ऐसी - वैसी -जैसी भी हो पर समय अपना लाएंगे ,
जिंदगी में कुछ कर गुजर जायेंगे ।।
घड़ी जैसी भी होगी पर समय अपना लाएंगे।।
~sanjay kumar sahu

बहुत सुंदर आदरणीय
ReplyDeleteSbse best kvita rhi h ye 3rd wala
ReplyDeleteBrilliant bro.
ReplyDeleteSuper duper hit okk
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteGjab bhaiya
ReplyDeleteNice line
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteGjb
ReplyDeleteThank you dears
ReplyDeleteअति सुन्दर मेरे भाई
ReplyDelete