नाम ----- जितेश्वरी साहू
शीर्षक --- "रंज को हराया जाय"
राज्य ---- छत्तीसगढ़
शीर्षक --- "रंज को हराया जाय"
राज्य ---- छत्तीसगढ़
कविता ---
बेवजह चलो यूं ही मुस्कुराया जाय ,
अश्क बहाये बहुत चलों रंज को हराया जाय ।
अश्क बहाये बहुत चलों रंज को हराया जाय ।
रिश्तें अक्सर जख्म दे जाते गहरें
चलों अजनबी की तरह ही निभाया जाय ।
चलों अजनबी की तरह ही निभाया जाय ।
ख्वाहिशों को सारी दफन कर दे कहीं
जिंदा होकर भी मृत - सा ही जीया जाय ।
जिंदा होकर भी मृत - सा ही जीया जाय ।
सजग बन कर प्रतिपल रही सचेता
क्यूं न कुछ पल यूं गफलत में बीताया जाय ।
क्यूं न कुछ पल यूं गफलत में बीताया जाय ।
जितेश्वरी साहू सचेता

Good one
ReplyDelete