कवयित्री का नाम-मीरा आर्ची चौहान
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक-मेहनत
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक-मेहनत
मेहनत जो करता है
सबके पेट की ज्वाला
शांत करने को,
वही आज भूखा है
पीड़ा और दुःख के
साये में।
कपड़े जो बुनता है
दुनिया को ठिठुरन से
बचाने को,
वही आज कांप रहा है
लकड़ियों के
बुझते-सुलगते
राख के बीच।
ईंट पर ईंट जो जोड़ता है
सबके लिए
आशियाना बनाने को,
उसी के सिर पर
छप्पर नहीं
सिर कहां छुपायेगा
बेबसी तले।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर
सबके पेट की ज्वाला
शांत करने को,
वही आज भूखा है
पीड़ा और दुःख के
साये में।
कपड़े जो बुनता है
दुनिया को ठिठुरन से
बचाने को,
वही आज कांप रहा है
लकड़ियों के
बुझते-सुलगते
राख के बीच।
ईंट पर ईंट जो जोड़ता है
सबके लिए
आशियाना बनाने को,
उसी के सिर पर
छप्पर नहीं
सिर कहां छुपायेगा
बेबसी तले।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर

अन्नदाता और शिल्पियों की पीड़ा झलक रही है। काश ऐसा होता कि सबका अच्छा ही होता
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