नाम - राहुल कुमावत
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर),राजस्थान
संपर्क - 9982393078
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर),राजस्थान
संपर्क - 9982393078
"मुसाफिर"
कागज की सड़क पर
कलम की गाड़ी,चलाता हूँ
मुसाफिर मंजिल का हूँ,मैं
रास्ता,खुद बनाता हूँ
कलम की गाड़ी,चलाता हूँ
मुसाफिर मंजिल का हूँ,मैं
रास्ता,खुद बनाता हूँ
कभी जब कोरे कागज़ पर
छपी श्याही को,पाता हूँ
में अपने अक्श को,अक्सर
उन्ही शब्दों में,पाता हूँ
छपी श्याही को,पाता हूँ
में अपने अक्श को,अक्सर
उन्ही शब्दों में,पाता हूँ
कभी जो रंग भरने को
कलम को छूता हूँ,अक्सर
में फिर रंगों की,दुनिया में
खुदी को,रंगता जाता हूँ
कलम को छूता हूँ,अक्सर
में फिर रंगों की,दुनिया में
खुदी को,रंगता जाता हूँ
कभी गुनगुनाता हूँ,अक्सर
नयी जब धुन,सजाता हूँ
में अपने दिल का,कोई राग
सुरों के साथ,गाता हूँ
नयी जब धुन,सजाता हूँ
में अपने दिल का,कोई राग
सुरों के साथ,गाता हूँ
कोई जब,ताल गूंजती है
मैं फिर उसपर,थिरकता हूँ
झूमकर हर इक,ताल पर
मैं नाचता और नचाता हूँ
मैं फिर उसपर,थिरकता हूँ
झूमकर हर इक,ताल पर
मैं नाचता और नचाता हूँ
जिन्दगी के,रंगमंच पर
नए किरदार,दिखतें है
में फिर उन सब
किरदारों को
अपने ही अन्दर,पाता हूँ
नए किरदार,दिखतें है
में फिर उन सब
किरदारों को
अपने ही अन्दर,पाता हूँ
कभी जो हँसता हूँ,मैं,जब
सभी को खूब,हँसाता हूँ
यूँ ही हँसते-हँसाते,मैं
मसखरा,बन जाता हूँ
सभी को खूब,हँसाता हूँ
यूँ ही हँसते-हँसाते,मैं
मसखरा,बन जाता हूँ
कभी जो गढ़ता हूँ,पत्थर
मैं जब शिल्प,बनाता हूँ
मैं उस बेजान,पत्थर में
खुदा का रूप,पाता हूँ
मैं जब शिल्प,बनाता हूँ
मैं उस बेजान,पत्थर में
खुदा का रूप,पाता हूँ
कभी जब खैलता हूँ,खैल
मैं अक्सर,हार जाता हूँ
मगर सब हार कर भी,मैं
खुदपर,जीत पाता हूँ...
मैं अक्सर,हार जाता हूँ
मगर सब हार कर भी,मैं
खुदपर,जीत पाता हूँ...
कागज की,सड़क पर
कलम की गाड़ी,चलाता हूँ
मुसाफिर मंजिल का हूँ,मैं
रास्ता,खुद बनाता हूँ...
कलम की गाड़ी,चलाता हूँ
मुसाफिर मंजिल का हूँ,मैं
रास्ता,खुद बनाता हूँ...
नाम - राहुल कुमावत

तनसुख
ReplyDeleteवाह भाई बहुत खूब लिखा।
शुक्रिया सर
Deleteकुमावत जी शानदार
ReplyDeleteधन्यवाद बजरंग जी
Deletevery nice lines...
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