कवि अजयशेखर नेताम "नैऋत्य"
शीर्षक- तइहा ल लेगे बइहा
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- तइहा ल लेगे बइहा
राज्य- छत्तीसगढ़
"तइहा ल लेगे बइहा"
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नवा जबाना के तिरिया चरितरर
हम सबला कहा लेग गेहे,
आगे आगे नवा जिनिस अब
तइहा ला देख बइहा लेग गेहे...
हम सबला कहा लेग गेहे,
आगे आगे नवा जिनिस अब
तइहा ला देख बइहा लेग गेहे...
वो अलीन गलिन डेरौठी म डोकरी दाई ले किस्सा सुनना
करमा ददरिया भरथरी गीत के गंगा जमुना,
वो लुटावत मया अउ, छिनावत जिंदगानी
मोरे बर होगे हे फुले बिसरे,गीत के कहानी
पनपुरवा अऊ अंगाकर के रोटी, कहा नंदा गेहे,
आगे आगे नवा जिनिस अब......
करमा ददरिया भरथरी गीत के गंगा जमुना,
वो लुटावत मया अउ, छिनावत जिंदगानी
मोरे बर होगे हे फुले बिसरे,गीत के कहानी
पनपुरवा अऊ अंगाकर के रोटी, कहा नंदा गेहे,
आगे आगे नवा जिनिस अब......
वो गांव के लइका अऊ, लइका मन के टोली
हमजोली ठिठोली, कोंवर लाली चासनी जैसे बोली
वो गुल्ली डंडा अऊ, मस्त बांटी भौरा
गली खोर किंजरत येदे, खेलत डंडा पचरंगा
लिखई-पढ़ई, के हुबड़ई में, बचपना नंदा गेहे
आगेे आगे नवा जिनिस अब.........
हमजोली ठिठोली, कोंवर लाली चासनी जैसे बोली
वो गुल्ली डंडा अऊ, मस्त बांटी भौरा
गली खोर किंजरत येदे, खेलत डंडा पचरंगा
लिखई-पढ़ई, के हुबड़ई में, बचपना नंदा गेहे
आगेे आगे नवा जिनिस अब.........
आज सब हर गवावत हे अब अऊ कोई झन गवांये
न घर दुवारी छोड़ कोई, परदेश न जायें
माटी मया के भाखा ल, कोनो झन भुलाये
रंगे रहाय पिरित म, जुरियाये अऊ बंधाये
वो सुरता हर परदा कस, मोर अन्तस में छपा गेहे
मोर गांव गंवई जाने, कहा गंवा गेहे.....
आगे आगे नवा जिनिस अब
तइहा ला देख बइहा लेग गेहे
न घर दुवारी छोड़ कोई, परदेश न जायें
माटी मया के भाखा ल, कोनो झन भुलाये
रंगे रहाय पिरित म, जुरियाये अऊ बंधाये
वो सुरता हर परदा कस, मोर अन्तस में छपा गेहे
मोर गांव गंवई जाने, कहा गंवा गेहे.....
आगे आगे नवा जिनिस अब
तइहा ला देख बइहा लेग गेहे
अजयशेखर नेताम "नैऋत्य

अति उत्तम
ReplyDeleteNice yr
ReplyDeleteNice bro
ReplyDeleteBahut sundar bhai
ReplyDeleteबधाई
ReplyDeletelajawab line 👌
ReplyDeletelajawab line 👌
ReplyDeletelajawb line 👌
ReplyDeleteWat a buty thought in this poetry
ReplyDeleteWat a buty thought in this poetry
ReplyDeleteबहुत बढ़िया 👌 नेताम जी
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