नाम:-राहुल लोहट
पता:-गाँव खरड़वाल,तहसील नरवाना,जिला जीन्द(हरियाणा)
सम्पर्क सूत्र:-8168405003
विधा:-काव्य
➖➖➖➖➖
*तो समझो,वक्त खराब है*
➖➖➖➖➖
पता:-गाँव खरड़वाल,तहसील नरवाना,जिला जीन्द(हरियाणा)
सम्पर्क सूत्र:-8168405003
विधा:-काव्य
➖➖➖➖➖
*तो समझो,वक्त खराब है*
➖➖➖➖➖
बेवजह लंबी कतार हो,
न सुनी गई पुकार हो,
जीत की भी जब हार हो,
तो समझो,वक्त खराब है।
न सुनी गई पुकार हो,
जीत की भी जब हार हो,
तो समझो,वक्त खराब है।
जब आदमी रोकर सोता है,
खुद का ना किसी गैर का होता है,
मिलता मिलता जब
सब कुछ हाथों से खोता है,
तो समझो,वक्त खराब है।
खुद का ना किसी गैर का होता है,
मिलता मिलता जब
सब कुछ हाथों से खोता है,
तो समझो,वक्त खराब है।
जब जबरदस्ती पेट से
किसी को निकाला जाता है,
रसोई के कोने में ज़िस्म पर
तेल डाला जाता है,
जब खास के ही हाथों
विश्वास की तिजोरी का
तोड़ा ताला जाता है,
तो समझो,वक्त खराब है।
किसी को निकाला जाता है,
रसोई के कोने में ज़िस्म पर
तेल डाला जाता है,
जब खास के ही हाथों
विश्वास की तिजोरी का
तोड़ा ताला जाता है,
तो समझो,वक्त खराब है।
जब कोई बस रोता जाता है,
हाथ फैला कर,खाली ही हटाता है,
जब कोई कूड़े के ढेर से
चुग चुग कर खाता है,
तो समझो,वक्त खराब है।
हाथ फैला कर,खाली ही हटाता है,
जब कोई कूड़े के ढेर से
चुग चुग कर खाता है,
तो समझो,वक्त खराब है।
जब कोई हमारा कल बताने लगे,
किसने रचा है हमारे खिलाफ
छल बताने लगे,
आँख मूंद कर
कितना नीचे है धरती के
जल बताने लगे,
तो समझो,वक्त खराब है।
किसने रचा है हमारे खिलाफ
छल बताने लगे,
आँख मूंद कर
कितना नीचे है धरती के
जल बताने लगे,
तो समझो,वक्त खराब है।
जब छू-मंत्र से मुट्ठी में कोई सोना दिखाए,
फिर एक-एक रुपये के लिये
कटोरा फैलाए,
जब चीख चीख बोलती
कलम की आवाज को सुना ना जाये,
तो समझो,वक्त खराब है।
फिर एक-एक रुपये के लिये
कटोरा फैलाए,
जब चीख चीख बोलती
कलम की आवाज को सुना ना जाये,
तो समझो,वक्त खराब है।
माँ के आँचल की आदत जब
छूट जाती है,
न जुड़ने वाली चीज जब
टूट जाती है,
रुह खुद से ही जब रुठ जाती है,
तो समझो,वक्त खराब है।
छूट जाती है,
न जुड़ने वाली चीज जब
टूट जाती है,
रुह खुद से ही जब रुठ जाती है,
तो समझो,वक्त खराब है।
ना चाहकर भी पतंग डोर को जब
छोड़ा जाता है
संभाल-संभाल रखा कुछ जब
जोर से पटक तोड़ा जाता है,
जिद्द में बेवक्त मिट्टी को जब
ओढ़ा जाता है,
तो समझो,वक्त खराब है।
छोड़ा जाता है
संभाल-संभाल रखा कुछ जब
जोर से पटक तोड़ा जाता है,
जिद्द में बेवक्त मिट्टी को जब
ओढ़ा जाता है,
तो समझो,वक्त खराब है।
जब ज़िस्म तेज सांसें करता है
मन जब एक ही सपने में व्यतीत
सारी रातें करता है,
जब दिल चाँद-तारे तोड़ने की
बाते करता है,
तो समझो," *राहुल* " के वक्त खराब है।
मन जब एक ही सपने में व्यतीत
सारी रातें करता है,
जब दिल चाँद-तारे तोड़ने की
बाते करता है,
तो समझो," *राहुल* " के वक्त खराब है।
➖०➖
*राहुल लोहट*

बहुत खूब राहुल जी ✍
ReplyDeleteआभार जी 🙏🙏🙏🙏
Deleteबहुत सुंदर रचना राहुल जी। ऐसे ही लिखते रहे।
ReplyDelete