नाम - सुभाष सैनी "सृजन"
राज्य - राजस्थान
विद्या - कविता
संपर्क सूत्र -9001019002
............रावण - चरित............
सकल ब्रह्माण्ड प्रबुद्ध मना,
दक्ष नीतिज्ञ वास्तुकला ज्ञाता।
कैकसी - विश्वश्रवा कुलावतरित,
दशानन ,दशकंधर कहलाता ।।
ब्रह्म उपास्य मृत्यु रक्षितः,
जीवन रहस्य पिंडिका स्थापिता।
तंत्र मंत्र मायावी सम्मोहन धरे,
सुदृढ़ धीर- वीर शक्तिमत्ता।।
षट मासिक शयन कुंभकर्ण,
मर्यादा विभीषण थे उसके भ्राता।
स्वर्ण नगरी प्रतिष्ठाता कुबेर भी ,
शास्त्र सम्मत था उसका भ्राता ।।
दानव - मय, हेम- अप्सरा तनया,
मंदोदरी उसकी जीवन संपोषिता।
अक्षय, अतिक्या, मेघनादादि
सप्त पुत्र उसके प्राण वल्लभाता।।
स्वर्ण जड़ित लंक समाजा ,
विद्वत - रत्नों से सुसज्जिता।
वृक्षायुर्वेद शास्त्री व सुषेण थे,
युद्ध जन्य मूर्च्छा उपचार कर्ता।।
नभ संचरण पुष्पक यान भी,
करता जग में श्रेष्ठ सिद्धता।
पर मणि - कांचन सदृश गुणों पर ,
सदा कर्म रेखा है विराजिता।।
सकर्म अकर्म का फल मिले ,
सकल मनु नीति आधारिता।
जानकी हरण व धर्म क्षयता,
अनीति बद हठधर्मिता ।।
मानवता व जग - रक्षार्थ ,
जब राम रावण संहारता ।
तब आश्विन शुक्ल दशमी को सकल,।
जग अधर्म पर धर्म की जीत मनाता ,
मौलिक रचना - सर्वाधिकार सुरक्षित
सुभाष सैनी "सृजन"
संपर्क सूत्र - 9001019002
बहुत अच्छे
ReplyDeleteशानदार
ReplyDeleteSuper bhai
ReplyDeleteW
ReplyDeleteBhut badiya sir
Thanks
ReplyDeleteशानदार भावाभिव्यक्ति
ReplyDeleteअतिशोभनम्
ReplyDeletesir mean kya h kavita kya
ReplyDeleteएक बुरा गुण सौ अच्छे गुणों की महत्ता को नष्ट कर सकता है ।
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत रचना। बधाई।
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