Wednesday, October 30, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि स्वपन बोस की रचना- कर्म योग



नाम स्वपन बोस
शिर्षक कर्म योग
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़
मोबाइल 9340433481

कृष्ण की वाणी है कर्म योग ।
हर कर्मफल कृष्ण को समर्पित है
कर्मयोग ।
जो करें निरन्तर कर्मयोग
लगता नहीं उसे भव बन्धन का रोग ।
मीट जाये सारे दुःख दुविधा ।
कर्मयोग जीसने जीवन में साधा ।
जो जीवन भर पत्नी बच्चें और
अपने अंहकार को फल देने के खातिर कर्म करता चलता है ।
जीवन के अंत समय बहुत पछताता है ।
धन दौलत भी बहुत है ।
महल भी है ऊंची ऊंची
सब पाकर भी यदि है कृष्ण से दुरी ।
जीवन से फिर दुःख न हटा
मन है बहुत बेचारी ।
स्वार्थकर्म नहीं है कर्मयोग गीता की यह वाणी है ।
जीवन में यदि नहीं है , कर्मयोग ।
झुठी सारी जीन्दगानी है ।
यह सच्चा प्यार , कहां किसी से किसी को ।
सब अंहकार का नाता है ।
कर्मयोग जीसने साध लिया ।
जीवन उसका सार्थक बन जाता है ।

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर । और मैं भी रायपुर की बेटी हूँ ।

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