Tuesday, October 8, 2019

बिहार से कवयित्री इन्दु कुमारी की रचना- बेटी की विदाई

इन्दु कुमारी ( मधुबनी)
राज्य - बिहार
शीर्षक - बेटी की विदाई
मो - 9931750656
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 कन्यादान हुआ जब पूरा,
               आया समय विदाई का
हंसी खुशी सब काम हुआ था
              सारी रस्म अदायगी का

बेटी के उस कातर स्वर ने
            बाबुल को झकझोर दिया
पूछ रही थी पापा तुमने
          क्या सचमुच में छोड़ दिया

अपने आंगन की फुलवारी
             मुझको सदा कहा तुमने
मेरे रोने को पल भर भी
             बिल्कुल नहीं सहा तुमने

क्या इस आंगन के कोने में
                 मेरा कुछ स्थान नहीं
अब मेरे रोने का पापा
             तुमको कोई ध्यान नहीं

देखो अंतिम बार देहरी
              लोग मुझको पुजवाते है
आकर के पापा क्यो इनको
                    आप नहीं धमकाते

नहीं रोकते चाचा ताऊ
                भैया से भी इस नहीं
ऐसी भी क्या निष्ठुरता है
                कोई आता पास नहीं

बेटी की बातों को सुनकर के
            पिता नही रह सका खड़ा
उमड़ पड़े आंखों में आंसू
              बदहवास सा दौड़ पड़ा

कातर बछिया सी वह बेटी
              लिपट पिता से रोती थी
जैसे यादों के अक्षर वो
              अश्रु बिन्दु से धोती थी

मां को लगा गोद से कोई
            मानो सबकुछ छीन चला
फुल सभी घर की फुलवारी से
               ज्यों कोई बीन चला

        इन्दु कुमारी
        मधुबनी बिहार

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