नाम - रश्मि शाही शर्मा
रायपुर, छत्तीसगढ़
अब तो शब्द ही मुझे लिखते हैं...
-----------------------------------------------------------------
रायपुर, छत्तीसगढ़
अब तो शब्द ही मुझे लिखते हैं...
-----------------------------------------------------------------
*अब तो शब्द ही मुझे लिखते हैं...*
सालो पन्नों पर अल्फाज़ मेरे बिखरते रहे,
मैं समझती शेर मेरे निखरते रहे...
हर लफ्ज़ आईना था मेरे मन का,
उन में जज़्बात मेरे दिखते रहे...
मैं समझती शेर मेरे निखरते रहे...
हर लफ्ज़ आईना था मेरे मन का,
उन में जज़्बात मेरे दिखते रहे...
अब जब कलम उठती है मेरी,
सफ्हे के सिरे तक रुकते नहीं...
ज़माने के अंदाज़ देख कर,
पैर उसके एक जगह टिकते नहीं...
सफ्हे के सिरे तक रुकते नहीं...
ज़माने के अंदाज़ देख कर,
पैर उसके एक जगह टिकते नहीं...
सूरत-ए-हाल आईना बन बन कर,
सफ्हे-सफ्हे पर तमन्नाएं रिसते हैं...
कुछ कहने का रह गया नहीं दरकार,
अब तो शब्द ही मुझे लिखते हैं...
सफ्हे-सफ्हे पर तमन्नाएं रिसते हैं...
कुछ कहने का रह गया नहीं दरकार,
अब तो शब्द ही मुझे लिखते हैं...
रश्मि...

No comments:
Post a Comment