नाम-अनिता सुभाष देशमुख
राज्य-छत्तीसगढ़
मोबाइल-
राज्य-छत्तीसगढ़
मोबाइल-
साक्षात्कार
विकट समस्या आने से पहले,
मिटा लो हर अन्धकार,
कर लो संतुलित आत्मा को,
लेकर आज आत्म साक्षात्कार।
मिटा लो हर अन्धकार,
कर लो संतुलित आत्मा को,
लेकर आज आत्म साक्षात्कार।
सहज जीवन जीने का,
रास्ता है बहुत सरल,
परम चैतन्य पाने का,
केवल है एक यही आधार।
रास्ता है बहुत सरल,
परम चैतन्य पाने का,
केवल है एक यही आधार।
अग्नि,वायु,पृथ्वी,
जल ,आकाश है ये पांच तत्व,
जिनके जागृत होने से ही,
मनुष्य होता है पूर्णतः परिपक्व।
जल ,आकाश है ये पांच तत्व,
जिनके जागृत होने से ही,
मनुष्य होता है पूर्णतः परिपक्व।
मद, मोह, लोभ,
माया मत्सर,
है पाँच आसुरी शक्ति,
जिसको नष्ट करती है,
आत्म साक्षात्कार की भक्ति।
माया मत्सर,
है पाँच आसुरी शक्ति,
जिसको नष्ट करती है,
आत्म साक्षात्कार की भक्ति।
पाँच तत्व और सात तत्व से,
बना है मानव शरीर,
बाएँ में श्री भैरव विराजे,
दाएँ में श्री महावीर।
बना है मानव शरीर,
बाएँ में श्री भैरव विराजे,
दाएँ में श्री महावीर।
पहला चक्र का मूलाधार,
जो शरीर है आधार,
होता जन्म इसी से मानव का,
श्री गणेश जी का ये दरबार।
जो शरीर है आधार,
होता जन्म इसी से मानव का,
श्री गणेश जी का ये दरबार।
इसलिए हर काम से पहले,
इनका ही पूजन होता है,
इन्ही के विराजमान होने से ही,
बच्चे का जन्म होता है।
इनका ही पूजन होता है,
इन्ही के विराजमान होने से ही,
बच्चे का जन्म होता है।
इड़ा है बायीं नाड़ी,
दाईं नाड़ी है पिंगला,
मध्य नाड़ी का पड़ा,
नाम है सुषुम्ना।
दाईं नाड़ी है पिंगला,
मध्य नाड़ी का पड़ा,
नाम है सुषुम्ना।
जब इड़ा नाड़ी में होती पकड़
भूतकाल का विचार हमें सताती है,
इन्ही विचारों से लकवा,
कैंसर की बिमारी आती है।
भूतकाल का विचार हमें सताती है,
इन्ही विचारों से लकवा,
कैंसर की बिमारी आती है।
पिंगला नाड़ी जब हो असंतुलित,
मन भविष्य की योजना बनाती है,
ये योजनाएं ही शरीर में,
अवसाद,शुगर की बीमारी लाती है।
मन भविष्य की योजना बनाती है,
ये योजनाएं ही शरीर में,
अवसाद,शुगर की बीमारी लाती है।
सुषुम्ना में हो कोई बाधा,
अपवित्र विचार आती है,
मानसिक बीमारी से,
जीवन विघटित हो जाती है।
अपवित्र विचार आती है,
मानसिक बीमारी से,
जीवन विघटित हो जाती है।
बाएँ मे श्री महाकाली,
दाएँ श्री महासरस्वती है,
मध्य में बैठी श्री महालक्ष्मी,
हमें संतुलित करती है।
दाएँ श्री महासरस्वती है,
मध्य में बैठी श्री महालक्ष्मी,
हमें संतुलित करती है।
बिना आत्म ज्ञान के,
ईश्वर से जुड़ पाना असंभव है,
चित्त हो जब निर्मल,
परम शक्ति से जुड़ना संभव है।
ईश्वर से जुड़ पाना असंभव है,
चित्त हो जब निर्मल,
परम शक्ति से जुड़ना संभव है।
किस्मत से मिलता है मानव जीवन
इसे कोई न व्यर्थ गवाएँ।
लेकर आत्म साक्षात्कार,
जीवन को अपने सुखी बनाएँ।
इसे कोई न व्यर्थ गवाएँ।
लेकर आत्म साक्षात्कार,
जीवन को अपने सुखी बनाएँ।
स्वरचित
अनिता सुभाष देशमुख
चंदना, राजिम,छत्तीसगढ़
अनिता सुभाष देशमुख
चंदना, राजिम,छत्तीसगढ़

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