Monday, October 28, 2019

छत्तीसगढ़ से कवयित्री नलिनी बाजपेयी की रचना- उजाला


कवयित्री का नाम-नलिनी बाजपेयी
राज्य  -छत्तीसगढ़ शीर्षक -उजाला
मो.नम्बर -
      उजाला
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"घोर तिमिर नैराश्य की,
आशाओं का उजास
भर जाने दो।
पीड़ित,दुखित उर पीर की,
संवेदनाओं के रव से
भर जाने दो।
धर्म, जाति, ऊँच, नीच के गड्ढे,
समरसता के भाव से
भर जाने दो।
लगा हो खग्रास जब संसृति में,
प्रेम, स्नेह रुपी मोक्ष से
पूनम प्रकाश भर जाने दो।
कोलाहल मची है दुनियां में,
वसुधैव कुटुम्बकम का राग
बह जाने दो।
मंदिर,मस्जिद,गिरजाघर  संग
शिवालय बन जाने दो।
उदासी की स्याह,अंधेरी रातों में,
सुरमई दीप जला,
उजाला भर जाने दो।
    नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर (छ. ग.)

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