रचनाकार - गजेंद्र द्विवेदी गिरीश
राज्य - छत्तीसगढ़ (भिलाई 3)
संपर्क - 7000858588
शीर्षक - चाहता हूँ
राज्य - छत्तीसगढ़ (भिलाई 3)
संपर्क - 7000858588
शीर्षक - चाहता हूँ
मैं तेरी आजमाइशें फिर जीना चाहता हूँ।
बिखरने का दर्द फिर पीना चाहता हूं।। मैं तेरी …
बिखरने का दर्द फिर पीना चाहता हूं।। मैं तेरी …
सच्ची तेरी इबादत, उलझा सा हूँ कहीं मैं,
सुलझेगा ना पलों में, महीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
सुलझेगा ना पलों में, महीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
तार तार हो चले थे दिल के भाव मेरे,
तुझपे कह गजल मैं सीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
तुझपे कह गजल मैं सीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
बेमन के खेल में कालिख ही हाथ आई,
संग तेरे जुड बनूँ मैं नगीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
संग तेरे जुड बनूँ मैं नगीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
दुनिया के तानेबाने मुझको लगे थकाने,
खुशबु से हो भरा वो पसीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
खुशबु से हो भरा वो पसीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
लहू में है अयोध्या, हर रोम में है काशी,
साँसों में बसे मक्का मदीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
साँसों में बसे मक्का मदीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
गिरीश दूरियों की अब चाहे इन्तहां हो,
गर है जरुरी पर्दा, हो झीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
गर है जरुरी पर्दा, हो झीना चाहता हूँ।। मैं तेरी …
गजेंद्र द्विवेदी गिरीश

Wah wah
ReplyDeletedili aabhaar aapka
Deleteहमेशा की तरह ह्रदय स्पंदित करती रचना भैया...
ReplyDeleteसादर प्रणाम
दिली आभार भाई
ReplyDeleteखुश रहो हमेशा